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उज्जैन में हुई “योगिराज तैलंग स्वामीः काशी के शित” के वर्किंग टाइटल की घोषणा प्रेस क्लब तरण ताल पर की काशी के चलते-फिरते शिव के जीवन पर बनेगी फिल्म!

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उज्जैन, 2 नवंबर सोमवार अवधूत म्यूज़िक और एम्बर लेंस एंटरटेनमेंट ने फिल्म निर्देशक प्रीति सिंह ने प्रेस क्लब तरण ताल पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में अपनी आगामी फ़िल्म “योगिराज तैलंग स्वामीः काशी के शिव” के वर्किंग टाइटल और पोस्टर की घोषणा की। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा के महान योगी और सिद्ध पुरुष तेलंग स्वामी के असाधारण जीवन, आध्यात्मिक ज्ञान और विरासत से प्रेरित एक फ़ीचर फ़िल्म का निर्माण शुरू होने जा रहा है। फ़िल्म का वर्किंग टाइटल “योगिराज तैलंग स्वामीः काशी के शिव” रखा गया है और यह फ़िल्म फिलहाल प्री-प्रोडक्शन के चरण में है। इस फ़िल्म का निर्देशन विज्ञापन और फ़िल्म निर्देशक प्रीति सिंह करेंगी, जो अपनी पिछली फ़ीचर फ़िल्म ‘अलिया बसु गायब है’ के लिए जानी जाती हैं। यह फ़िल्म Lionsgate Play पर रिलीज़ हुई थी। तेलंग स्वामी वाराणसी की आध्यात्मिक परंपरा के सबसे प्रतिष्ठित सिद्ध योगियों में से एक माने जाते हैं। वे हठयोग और अपनी असाधारण योग साधनाओं के लिए प्रसिद्ध थे। वे लाहिड़ी महाशय, श्री रामकृष्ण परमहंस और आनंदमयी माँ जैसी महान आध्यात्मिक विभूतियों के समकालीन थे। श्री रामकृष्ण परमहंस ने उन्हें ‘काशी के चलते-फिरते शिव’ के रूप में संबोधित किया था। ! परमहंस योगानंद ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक ‘ऑटोबायोग्राफी ऑफ अ योगी’ में भी तेलंग स्वामी का उल्लेख एक महान सिद्ध पुरुष के रूप में किया है, जिन्होंने वाराणसी में रहते हुए प्रकृति और मानव शरीर पर असाधारण नियंत्रण प्रदर्शित किया था।यह फ़िल्म केवल एक आध्यात्मिक महापुरुष की जीवनी प्रस्तुत करने का प्रयास नहीं है, बल्कि भारत की प्राचीन आध्यात्मिक परंपराओं और आज के आधुनिक जीवन के बीच एक भावनात्मक और वैचारिक सेतु बनाने की कोशिश है।फ़िल्म की कहानी का केंद्र है तृष्णा, आज के दौर की एक युवा लड़की, जो 21वीं सदी की जटिलताओं के बीच अपनी पहचान, अस्तित्व और जीवन के उ‌द्देश्य को तलाश रही है। आंतरिक संघर्षों और जीवन में दिशाहीनता के बीच उलझी तृष्णा एक ऐसे मोड़ पर पहुँचती है, जहाँ परिस्थितियाँ उसे सिद्ध योगी तेलंग स्वामी के आध्यात्मिक आशीर्वाद और उनकी विरासत के करीब ले आती हैं। यहीं से शुरू होती है उसकी आत्मखोज और आत्मबोध की एक असाधारण यात्रा। तृष्णा की इस यात्रा के माध्यम से फ़िल्म दर्शकों को क्रिया योग के मूल दर्शन, उसकी गहराई और उससे जुड़े आध्यात्मिक सिद्धांतों से परिचित कराने का प्रयास करेगी। यह शरीर, मन और चेतना के आपसी संबंधों को समझने की एक सिनेमाई कोशिश होगी।फ़िल्म का उद्देश्य केवल एक आध्यात्मिक गुरु की कहानी कहना नहीं, बल्कि उन लोगों तक आशा, शक्ति और आत्मचिंतन का संदेश पहुँचाना है, जो आज के अनिश्चित और उलझे हुए समय में अपने जीवन के अर्थ और उद्देश्य की तलाश कर रहे हैं।इस फ़िल्म के निर्माता, कु, बलवीर सिंह सोलंकी, निकिता वर्मा लंबे समय से तेलंग स्वामी के असाधारण जीवन और आध्यात्मिक विरासत को बड़े पर्दे पर लाने की इच्छा रखते थे। विज्ञापन फ़िल्मों, म्यूज़िक वीडियोज़ और डॉक्यूमेंट्रीज़ सहित ऑडियो-विजुअल प्रोडक्शन के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय रहे निर्माताओं को हाल के वर्षों में भारतीय आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विषयों पर आधारित फ़िल्मों के प्रति दर्शकों की बढ़ती रुचि ने इस परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रोत्साहन दिया।
एक समकालीन किरदार और कालजयी, आध्यात्मिक दर्शन के मेल से बनी यह फ़िल्म भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत को आज की पीढ़ी के सवालों, उसकी पहचान की तलाश और जीवन को गहराई से समझने की इच्छा से जोड़ने का प्रयास करेगी।
फ़िल्म फिलहाल प्री-प्रोडक्शन के चरण में है। फ़िल्म से जुड़े प्रमुख नाम प्रस्तुति अवधूत म्यूज़िक और एम्बर लेंस एंटरटेनमेंट
फ़िल्म – योगिराज तैलंग स्वामीः काशी के शिव‌ निर्देशन – प्रीति सिंह निर्माता कु. बलवीर सिंह सोलंकी, निकिता वर्मा
सहयोगी निर्माता – अभिषेक बनर्जी आदि

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