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उज्जैन राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिल भारतीय महासभा तीर्थ पुरोहित पंडित रामकृष्ण तिवारी एवं उज्जैन पंडा तीर्थ पुरोहित के अध्यक्ष राजेश त्रिवेदी ने निजी गार्डन में पत्रकार को जानकारी देते हुए बताएंगार्डन

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उज्जैन दिनांक 9 सितंबर बुधवार को अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा (रजिस्टर्ड संपूर्ण भारत) हमारे सनातन धर्म परंपरा से जुड़े सभी प्रकार के मुद्दों में जिसके अंतर्गत मंदिर अधिग्रहण, घाटों के संरक्षण में हस्तक्षेप एवं परंपरा के विरुद्ध किया गया प्रशासनिक तथा शासकीय कार्य जो सभी प्रकार की वैदिक परंपराओं को ठेस पहुंचाते हैं महासभा शासन प्रशासन के इस प्रकार के किए जाने वाले कृत्यों का विरोध करती है। यही नहीं पिछले 5 दशकों से महासभा के माध्यम से अलग-अलग प्रकार की लड़ाईयां लड़ी गई जिसके अंतर्गत माननीय सर्वोच्च न्यायालय के द्वारा अलग-अलग तीर्थों पर लड़ाइयों को जीता भी गया साथ ही महासभा के क्रिया पद्धति के अंतर्गत आने वाले भारत के संपूर्ण तीर्थ जो महासभा से संबद्ध है उनके लिए समय-समय पर शासन प्रशासन के प्रतिरोध को देखना तथा समझाना होता है। और रणनीति बनाकर के शासन से धर्म हित की अनुशंसा भी करनी होती है एवं सहयोग लेना और देना पड़ता है।
. पिछले 5 दशकों में कई ऐसे उदाहरण है जो महासभा के सनातन धर्म से संबद्ध प्रत्यक्ष शासकीय विरोध के सामने सामाजिक एवं धार्मिक स्तर पर संगठनात्मक आधार पर एकीकृत होकर के शासन प्रशासन की गलत नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन भी किये गये एवं संबंधित विषयों में सफलता भी प्राप्त की। वर्तमान में उज्जैन में शिप्रा तट पर स्थित राणो जी की छतरी के घाट पर महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के माध्यम से जो परंपरा विरुद्ध आरती करने का अनुक्रम आरंभ किया गया है वह परंपरा एवं वैदिक संरक्षण के विरुद्ध है क्योंकि पण्डा पुरोहित परंपरा में कई पीढियों का संघर्ष एवं योगदान के साथ-साथ बलिदान भी रहा है।कदाचित प्रशासन एवं शासन इस योगदान एवं बलिदान को भूल गया है यही कारण है कि भारतीय समाज के चरणबद्ध स्तंभ यहां के तीर्थ पुरोहित एवं पण्डों का सम्मान एवं अधिकार को प्रभावित करने का प्रयास किया जा रहा है यह नीति विरुद्ध भी है एवं धर्म विरुद्ध भी इस दृष्टि से प्रशासन एवं शासन को समाज के एवं भारतीय शास्त्रीय परंपरा के चार वर्णों में प्रधान ब्राह्मण वर्ण को को प्रभावित करना प्रकृति के विरुद्ध जाना है अतः प्रशासन एवं शासन को शीघ्र संज्ञान लेते हुए यहां की स्थानीय परंपराओं को पण्डों एवं पूर्वाहितों के हाथ में सौंपना चाहिए जिससे सौहार्दता के साथ-साथ राजनीति एवं धर्म नीति का संबंध निर्बाध चलता रहे।.अखिल भारतीय तीर्थ पुरोहित महासभा जो आज लगभग 135 तीर्थ का प्रतिनिधित्व करती है उन्ही तीर्थों में से प्रमुख प्रमुख तीर्थ आज संबंधित विषय को लेकर के उपस्थित हुए हैं और यह संघर्ष यदि ज्ञापन अथवा निवेदन से सुलझ जाता है तो ठीक है अन्यथा संपूर्ण भारत में सभी तीर्थों पर उज्जैन की लड़ाई लड़ी जाएगी।

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