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उज्जैन गंगा दशहरा पर मां शिप्रा का पूजन एवं चिंतामन गणेश मंदिर पर विश्व कल्याण में सभी की मंगल कामना करते हुए संत महंत

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जगतगुरू शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज की अध्यक्षता, श्रीमहंत हरि गिरि महाराज के पावन सानिध्य व श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी महाराज के मार्गदर्शन में संतों ने गंगा दशहरा पर शिप्रा पूजन कियाः श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज
संतों ने श्री चिंतामन गणेश मंदिर में तीन स्वरूपों में विराजमान भगवान गणेश की पूजा-अर्चना की हवन में विश्व कल्याण व सभी के मंगल की कामना के लिए आहुति दी उज्जैनः मध्य प्रदेश
उर्घ्वाम्नाय श्रीकाशीसुमेरू पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य अनन्त श्रीविभूषित स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के पावन सानिध्य व जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज व मनसा देवी ट्रस्ट के अध्यक्ष तथा अखाडा परिषद अध्यक्ष निरंजनी अखाड़ा के सचिव श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी महाराज,के मार्गदर्शन में संतों ने सोमवार को गंगा दशहरा के पावन पर्व पर शिप्रा पूजन किया। श्री चिंतामन गणेश मंदिर में पूजन-अर्चन किया गया। जूना अखाड़ा के वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज, वरिष्ठ श्रीमहंत उमाशंकर भारती महाराज, श्रीमहंत केदारपुर जी महाराज, उपाध्यक्ष श्रीमहंत महेश पुरी महाराज, सिद्धपीठ श्री दूधेश्वर नाथ मठ महादेव मंदिर गाजियाबाद के पीठाधीश्वर जूना अखाड़ा के अंतर्राष्ट्रीय प्रवक्ता, दिल्ली संत महामंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष व जूना अखाड़ा की 13 मढ़ी के अध्यक्ष श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज समेत सभी संतों ने विश्व कल्याण व सभी के मंगल की कामना के लिए हवन कर आहुति दी। उर्घ्वाम्नाय श्रीकाशीसुमेरू पीठाधीश्वर जगतगुरू शंकराचार्य अनन्त श्रीविभूषित स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने कहा कि गंगा दशहरा पर्व का सनातन धर्म में बहुत अधिक महत्व है, क्योंकि इस दिन ही मां गंगा लोगों के पाप हरने के लिए पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। जूना अखाड़ा के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि महाराज ने कहा कि गंगा दशहरा का पर्व आध्यात्मिक शुद्धि का पर्व है। इस पर्व पर गंगाद स्नान करने से मनुष्य के 10 तरह के पाप नष्ट हो जाते हैं और लोगों को सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। मनसा देवी ट्रस्ट व अखिल भारतीय अखाडा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत डॉ रविंद्र पुरी महाराज, ने कहा कि गंगा दशहरा पर श्रद्धापूर्वक मां गंगा की आराधना करने और गंगा में स्नान करने से सभी पापों का नाश होता है। जूना अखाड़ा के वरिष्ठ अध्यक्ष श्रीमहंत प्रेम गिरि महाराज ने कहा कि गंगा दशहरा पर्व पर गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने व अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने का कई गुना अधिक पुण्य फल प्राप्त होता है। जूना अखाड़ा के अध्यक्ष श्रीमहंत मोहन भारती महाराज ने कहा कि गंगा दशहरा पर गंगा नदी में स्नान व दान करने से पापों का नाश होता है और जीवन में सुख.समृद्धि आती है। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि गंगा दशहरा का पर्व मां गंगा के पृथ्वी पर अवतरण के उपलक्ष्य में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गंगा नदी में आस्था की डुबकी लगाने से भक्तों के सभी ज्ञात-अज्ञात पाप धुल जाते हैं और उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस त्योहार को दशहरा इसलिए कहा जाता है क्योंकि गंगा नदी में स्नान करने से व्यक्ति के दशविध यानि 10 प्रकार के पापों का हरण, विनाश होता है।सभी संतों ने श्री चिंतामन गणेश मंदिर में भगवान गणेश के तीन स्वरूपों श्री चिंतामन गणेश, श्री इच्छामन गणेश व सिद्धिविनायक गणेश की पूजा-अर्चना कर सभी के मंगल की कामना की। श्रीमहंत नारायण गिरि महाराज ने बताया कि श्री चिंतामन गणेश मंदिर उज्जैन की पावन एवं आध्यात्मिक भूमि पर स्थित श्री चिंतामन गणेश मंदिर भगवान गणेश के सबसे प्राचीन और प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है। यह मंदिर शिप्रा नदी के निकट स्थित है और श्रद्धालुओं के लिए आस्था एवं विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस पावन मंदिर में भगवान गणेश के तीन अद्भुत और चमत्कारी स्वरूप एक साथ विराजमान हैं। श्री चिंतामन गणेश भक्तों की समस्त चिंताओं का हरण करते हैं। श्री इच्छामन गणेश सच्चे मन से की गई हर इच्छा को पूर्ण करते हैं। श्री सिद्धिविनायक गणेश रिद्धि-सिद्धि व सुख-समृद्धि और सफलता का आशीर्वाद देते हैं। यह स्थल प्राचीन काल से ही आस्था का केंद्र रहा है। मान्यता है कि त्रेतायुग में भगवान श्री राम, माता सीता और लक्ष्मण जी वनवास के दौरान इस पवित्र स्थान पर पधारे थे। माता सीता को प्यास लगने पर लक्ष्मण जी ने अपने बाण से भूमि से जल प्रकट कियाए जिससे यहां एक पवित्र बावड़ी का निर्माण हुआ। ऐसा कहा जाता है कि भगवान श्री राम ने यहां चिंतामन गणेश, लक्ष्मण जी ने इच्छामन गणेश तथा माता सीता ने सिद्धिविनायक गणेश की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की थी। श्रीमहंत आनंदपुरी महाराज, सचिव श्रीमहंत रामेश्वरानंद गिरि महाराज सचिव श्रीमहंत आदित्य गिरि महाराज, सचिव श्रीमहंत रत्न गिरि महाराज, सचिव श्रीमहंत ओम भारती महाराज, सचिव श्रीमहंत सहदेवानंद गिरि महाराज कर्नाटक मंत्री श्रीमहंत आनंदेश्वरानंद गिरि महाराज, मंत्री महंत गिरिशानंद गिरि महाराज, किन्नर अखाड़ा के महामंडलेश्वर पवित्रानंद गिरि महाराज, श्रीमहंत पृथ्वी गिरि महाराज, दत्त अखाड़ा के पीठाधीश्वर श्रीमहंत सुंदर पुरी महाराज, ब्रह्मलीन पायलट बाबा की प्रमुख शिष्य जापान से साध्वी केको ऐकावा योग माता केवलानंद गिरि, महामंडलेश्वर साध्वी चेतनानंद गिरि, साध्वी श्रद्धांनद गिरि, श्रीमहंत शिवानंद सरस्वती महाराज, महंत राघवेंद्र पुरी महाराज, महंत विद्या गिरि महाराज पंजाब, थानापति परमानंद गिरि महाराज थानापति चांद गिरि महाराज, थानापति नीलकंठ गिरि महाराज, थानापति मोनानंद गिरि महाराज, माया देवी हरिद्वार के पुजारी भास्करानंद गिरि महाराज, पत्रकार राहुल कटियार, अखाडा परिषद के प्रवक्ता गोविंद सौलंकी आदि ने भी मंदिर में पूजा-अर्चना की।

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