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उज्जैन निरंजनी अखाड़े में माता स्वरूपा कन्या पूजन, संतो का समागम एवं भंडारा रामनवमी पर पारंपरिक कार्यक्रम में जुटे सभी अखाड़ों के साधु संत, यज्ञ के साथ ही पूर्णाहूती

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उज्जैन। शुक्रवार बड़नगर रोड स्थित श्री पंचायती निरंजनी अखाडे में धार्मिक आस्था और परंपरा के साथ कन्या पूजन का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष रवींद्र पुरी महाराज, अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज सहित संत-महात्माओं की गरिमामयी उपस्थिति रही।संतो एवं श्रद्धालुओं ने नवदुर्गा स्वरूप कन्याओं का पूजन कर लिया आशीर्वाद लिया कार्यक्रम में संतों ने कन्याओं के चरण पूजकर उन्हें चुनरी, प्रसाद एवं उपहार भेंट किए। रवींद्र पुरी महाराज ने स्वयं कन्याओं का पूजन कर उनका आशीर्वाद लिया और कहा कि सनातन परंपरा में कन्या को देवी का स्वरूप माना जाता है।*सनातन धर्म में एकता और समरसता का संदेश*इस अवसर पर रवींद्र पुरी महाराज ने कहा कि हिंदू सनातन धर्म सभी को साथ लेकर चलने की प्रेरणा देता है। उन्होंने बताया कि अखाड़ा परिषद ने हमेशा सर्व समाज को जोड़ने का कार्य किया है और किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं किया।गंगा दशहरा पर विशेष जलाभिषेक की घोषणा*रवींद्र पुरी महाराज ने जानकारी दी कि अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के महामंत्री हरि गिरि महाराज द्वारा गंगा दशहरा के अवसर पर हरिद्वार से गंगाजल लाकर बाबा महाकाल का जलाभिषेक किया जाएगा। यह आयोजन धार्मिक आस्था और परंपरा का विशेष प्रतीक होगा।धार्मिक आयोजनों से बढ़ती है सामाजिक सद्भावना कार्यक्रम के अंत में संतों ने कहा कि इस प्रकार के धार्मिक आयोजन समाज में सद्भाव, एकता और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करते हैं। कन्या पूजन जैसे आयोजन न केवल परंपराओं को जीवित रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी संस्कारों से जोड़ने का कार्य करते हैं। रवींद्र पुरी महाराज ने बताया कि अखाड़ा परिषद द्वारा विभिन्न वर्गों से संतों को सम्मानित कर महामंडलेश्वर एवं जगतगुरु जैसे पदों पर प्रतिष्ठित किया गया है, जिससे समाज में समरसता और समानता का भाव मजबूत हुआ है। इस अवसर पर जूना अखाड़े के विद्या भारती जी महाराज, आहान अखाड़े के सेवानंद गिरी जी, महानिर्वाणी के मुकुंदपुरी जी महंत सुरेश्वरानंदपुरी, महामाया आश्रम महंत देवगिरी जी, महंत प्रणवा नंद जी, सिद्धाश्रम ऋणमुक्तेश्वर महादेव के महंत महावीर नाथ जी, सहित अखाड़ा परिषद के प्रवक्ता गोविंद सोलंकी समन्वयक डॉ. राहुल कटारिया, पंडित संजय दिवटे, आनंद पांचाल, हेमंत सेन,पुरोहित पंडित संजय वधेका, तिलक वधेका, पंडित तन्मय वधेका, पंडित रुद्राक्ष वधेका सहित साधु महात्मा एवं हजारों की संख्या में श्रद्धालुगण उपस्थित रहे। संध्या में सुंदरकांड पाठ हुआ एवं देर रात तक यहां महाप्रसादी का दौर चला।

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