*सपना देखना अपराध नहीं, हर पार्टी चाहती है कि सरकार उनकी बने, पर ऐसा होता नहीं* – खुद को अखाड़ा परिषद का अध्यक्ष बताने के दावे पर महामंत्री हरिगिरी जी का पलटवार, बोले 13 अखाड़े के दो प्रमुख राष्ट्रीय पदाधिकारी मिलकर तय करते हैं अखाड़ा परिषद, किसी एक के बोलने से कुछ नहीं होता

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उज्जैन। महामंत्री हरि गिरि जी महाराज सपना देखना कोई अपराध नहीं है नहीं कोई बुरी बात। जैसे देश की हर राजनीतिक पार्टी यही चाहती है कि सरकार उनकी बने और राजनेता चाहते हैं कि वह मोदी की कुर्सी पर बैठे। ठीक ऐसा ही कुछ सपना महानिर्वाणी अखाड़े के रवींद्र पुरी भी देख रहे हैं। जबकि अखाड़ा परिषद का गठन प्रमुख 13 अखाड़े के दो राष्ट्रीय पदाधिकारी मिलकर तय करते हैं। किसी एक के कहने से कुछ नहीं होता। पूर्व से अखाड़ा परिषद अपना कार्य कर रही है उज्जैन में न तो कोई चुनाव प्रक्रिया हुई नहीं ऐसा कोई एजेंडा था। सोमवार को शहर आए अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़ा के मुख्य संरक्षक श्री महंत हरि गिरि जी ने यह पलटवार अखाड़ा परिषद को लेकर महानिर्वाणी अखाड़े के सचिव श्री महंत रविंद्रपुरी महाराज के बयान पर पलटवार करते हुए कही। विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन के उपरांत मीडिया के सवालों पर उन्होंने कहा कि हर कोई पद की लालसा रखता है इसके लिए बहुत प्रयास की जरूरत होती है। हरिद्वार, प्रयागराज कुंभ हमने किया और अब नासिक में कुंभ की तैयारी में वहां की सरकारों के साथ जुटे हैं। जहां भी कुंभ आता है इस तरह की बातें व भ्रम फैलाने की कोशिश होती है लेकिन हकीकत क्या है सबको पता है।
*विकास की राशि अखाड़े को मिले, कुछ नए निजी नाम चढ़ा ली भूमिया*
सिंहस्थ 2028 में अखाड़े को मिलने वाली विकास कार्यों कि राशि अखाड़े के नाम दर्ज भूमियों पर ही दी जाना चाहिए। हमें जानकारी लगी है कि तीनों वैष्णव अणि अखाड़ों के स्थानीय महंतो ने अखाड़े की भूमिया खुद के नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज करवा ली है, इसका दूरुस्तीकरण होना चाहिए। क्योंकि उनके मुख्यालय व अखाड़ा प्रमुखों द्वारा ही उज्जैन जिला प्रशासन को इस आशय के पत्र दिए गए। हम भी मुख्यमंत्री से यही मांग करते हैं कि जो पांच-पांच करोड़ की राशि दी जाना है, वह अखाड़े के नाम दर्ज भूमि पर ही दी जाए। नासिक में हम सब साथ, सभी ने किया भूमि पूजन*
वर्ष 2027 में नासिक कुंभ आयोजित होना है। हम शैव, वैष्णव अखाड़े एवं उदासीन अखाड़े ने साथ मिलकर वहां सरकार द्वारा दी गई राशि से अखाड़े में विकास के भूमि पूजन साथ में संपन्न कराए हैं। इससे साफ है कि हमारे बीच कोई मतभेद नहीं है। कुछ स्थानीय साधु संतों ने उज्जैन में यह भ्रम फैलाने का प्रयास किया है जिस पर हम ज्यादा

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