श्री राम तिवारी निदेशक महाराज विक्रमादित्य शोध पीठ सांस्कृतिक सलाहकार ने जानकारी देते हुए कहा कि माननीय मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश शासन शिप्रा तट पर 19 मार्च को सजेगा ‘सृष्टि आरंभ दिवस उज्जयिनी गौरव दिवस’ विक्रम उत्सव 2026 का भव्य आयोजन”महादेव नदी कथा” से होगा शुभारंभ, विशाल मिश्रा की संगीतमय प्रस्तुति के साथ ड्रोन शो, आतिशबाजी, विक्रमादित्य अलंकरण एवं प्रकाशनों का लोकार्पण रहेगा आकर्षण उज्जैन। विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत 19 मार्च 2026 को सायं 7:00 बजे शिप्रा तट पर “सृष्टि आरंभ दिवस-उज्जयिनी गौरव दिवस” का भव्य आयोजन किया जाएगा, जो उत्सव के प्रथम चरण का प्रमुख आकर्षण रहेगा। भक्ति, संस्कृति और आधुनिक तकनीक के संगम से सजे इस आयोजन में “महादेव नदी कथा” की नृत्य-नाट्य प्रस्तुति, सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक विशाल मिश्रा की संगीतमय प्रस्तुति, ड्रोन शो, आतिशबाजी, सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण एवं महत्वपूर्ण प्रकाशनों का लोकार्पण जैसे विविध आकर्षण शामिल रहेंगे। इसी दिन प्रातः 5:30 बजे “कोटि सूर्योपासना” के साथ दिनभर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का शुभारंभ होगा, जिससे विक्रम उत्सव 2026 अपनी भव्यता और व्यापकता के साथ एक बार फिर उज्जयिनी की गौरवशाली परंपरा को सजीव करेगा।महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ एवं संस्कृति विभाग मध्यप्रदेश द्वारा आयोजित विक्रम उत्सव 2026 विस्तृत अवधि में 12 फरवरी से 30 जून 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। यह उत्सव उज्जयिनी की सांस्कृतिक, धार्मिक एवं ऐतिहासिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाने के साथ-साथ समकालीन विषयों को भी समाहित करने का प्रयास है। शोध पीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि इस वर्ष उत्सव को दो प्रमुख चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में 12 फरवरी से 19 मार्च तक विभिन्न सांस्कृतिक, धार्मिक, अकादमिक एवं शोधपरक गतिविधियों का आयोजन किया गया। इस अवधि में विविध कार्यक्रम, व्याख्यानमालाएं, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां एवं परंपरागत ज्ञान पर आधारित आयोजन संपन्न हुए। साथ ही विक्रम व्यापार मेला एवं वन मेला के माध्यम से व्यापारिक गतिविधियों, स्थानीय उत्पादों के प्रोत्साहन तथा नवाचारों को मंच प्रदान किया गया। विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत प्रथम चरण का मुख्य आयोजन 19 मार्च 2026 को सायं 7:00 बजे शिप्रा तट पर “सृष्टि आरंभ दिवस – उज्जयिनी गौरव दिवस” के रूप में भव्यता के साथ आयोजित किया जाएगा। द्वितीय चरण की शुरुआत 19 मार्च से “जल गंगा संवर्धन अभियान” के रूप में होगी। इसके अंतर्गत जल संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता एवं नदी पुनर्जीवन से संबंधित गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाएगा। इस अभियान में विशेष रूप से किसान कल्याण पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिनमें जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती, संसाधन संरक्षण एवं ग्रामीण विकास से जुड़ी पहलें शामिल रहेंगी। श्री तिवारी जी के अनुसार विक्रम उत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक आयोजनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सामाजिक सरोकारों, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक उन्नयन को भी समान महत्व देता है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे इस दीर्घकालीन उत्सव में सक्रिय सहभागिता कर उज्जैन की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने में सहयोग करें। शिप्रा तट पर पार्श्व गायक विशाल मिश्रा की प्रस्तुति
विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत 19 मार्च 2026 को सायं 7:00 बजे शिप्रा तट पर “सृष्टि आरंभ दिवस उज्जयिनी गौरव दिवस” का भव्य आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन उज्जयिनी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत, धार्मिक आस्था एवं ऐतिहासिक गौरव को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।कार्यक्रम में कला, संस्कृति और अध्यात्म का समन्वित स्वरूप प्रस्तुत किया जाएगा, जो दर्शकों के लिए अविस्मरणीय अनुभव रहेगा। कार्यक्रम की शुरुआत “महादेव नदी कथा” की भव्य नृत्य-नाट्य प्रस्तुति से होगी, जिसमें शिप्रा और भगवान शिव की महिमा का सजीव चित्रण किया जाएगा। इसके पश्चात सुप्रसिद्ध पार्श्वगायक विशाल मिश्रा एवं उनकी टीम द्वारा संगीतमय प्रस्तुति दी जाएगी। आयोजन में आधुनिक आकर्षण के रूप में भव्य आतिशबाजी एवं ड्रोन शो भी शामिल किया गया है। साथ ही प्रतिभाओं के सम्मान का विशेष कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इसके साथ ही विक्रम पंचांग 2083, भारत निधि (मोनोग्राफ), आर्ष भारत, 84 महादेव एवं विक्रमांक (पत्रिका) जैसे महत्वपूर्ण प्रकाशनों का लोकार्पण भी किया जाएगा। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री माननीय डॉ. मोहन यादव होंगे। इस गरिमामयी अवसर पर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) संस्कृति एवं पर्यटन धर्मेंद्र सिंह लोधी, प्रभारी मंत्री उज्जैन एवं राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) कौशल विकास एवं रोजगार गौतम टेटवाल, उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, विधायक उज्जैन उत्तर अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल एवं नगर निगम अध्यक्ष श्रीमती कलावती यादव की विशेष उपस्थिति रहेगी।
“कोटि सूर्योपासना” आयोजन की शुरुआत विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत “कोटि सूर्योपासना” का आयोजन 19 मार्च 2026 को प्रातः 5:30 बजे रामघाट एवं दत्त अखाड़ा पर किया जाएगा। उज्जैन में कार्यक्रम का संयोजन नवसम्वत्सर अभिनंदन समारोह समिति, अनुष्ठान मण्डपम-ज्योतिष अकादमी एवं नवसम्वत्सर नवविचार द्वारा किया जा रहा है। इस वर्ष यह कार्यक्रम मध्यप्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर विक्रम संवत् एवं सूर्योपासना के रूप में सामूहिक रूप से आयोजित किया जाएगा। सम्राट विक्रमादित्य नाट्य का मंचन भी 55 जिलों में हो रहा है। इसमें 1500 से अधिक कलाकार शामिल हैं। साथ ही ब्रह्म ध्वजा की भी स्थापना होगी।
5000 से अधिक कलाकार एवं 50 से अधिक मेले उज्जैन में आयोजित विक्रम उत्सव 2026 निरंतर नई ऊंचाइयों को छूते हुए प्रदेश ही नहीं, बल्कि देश के प्रमुख सांस्कृतिक आयोजनों में अपनी विशिष्ट पहचान बना रहा है। यह उत्सव केवल कार्यक्रमों का सिलसिला नहीं, बल्कि भक्ति, संगीत, संस्कृति और नवाचार का ऐसा संगम है, जहां प्रतिदिन एक नया इतिहास रचा जा रहा है। उत्सव के अंतर्गत आयोजित संगीत संध्याओं में देश के ख्यातनाम कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया है। कैलाश खेर की सूफियाना गूंज से लेकर श्रेया घोषाल, जुबिन नौटियाल, अमित त्रिवेदी, प्रीतम, हंसराज रघुवंशी एवं कन्हैया मित्तल जैसे कलाकार विभिन्न वर्षों में अपनी प्रस्तुतियां दे चुके हैं। इसी भव्य श्रृंखला को आगे बढ़ाते हुए 19 मार्च को विशाल मिश्रा अपनी संगीतमय प्रस्तुति से श्रोताओं को एक और यादगार संध्या का अनुभव कराएंगे, जिससे उत्सव की गरिमा और भी ऊंचाइयों तक पहुंचेगी। विक्रम उत्सव 2026 की भव्यता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अब तक इसमें 5000 से अधिक कलाकार भाग ले चुके हैं और लाखों की संख्या में दर्शक इसकी साक्षी बन चुके हैं। 50 से अधिक लाइव कॉन्सर्ट एवं नृत्य प्रस्तुतियां, 50 से अधिक भव्य मेले एवं आयोजन, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव, विज्ञान सम्मेलन तथा प्रदेश का सबसे बड़ा बिजनेस फेयर इस उत्सव को बहुआयामी स्वरूप प्रदान करते हैं। विशेष रूप से, आधुनिक तकनीक से सुसज्जित प्रदेश का सबसे बड़ा ड्रोन शो भी इस उत्सव का प्रमुख आकर्षण है, जिसने दर्शकों को एक नई अनुभूति प्रदान की है।विक्रम उत्सव 2026 न केवल सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का मंच है, बल्कि यह मध्यप्रदेश की समृद्ध परंपरा, रचनात्मकता और विकास की दृष्टि का प्रतीक बनकर उभर रहा है। यह उत्सव आज केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि गौरव, संस्कृति और भव्यता का जीवंत प्रतीक बन चुका है, जहां हर दिन नई उपलब्धियां और नए आयाम जुड़ते जा रहे हैं।सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण 2026 के आवेदन एवं चयन प्रक्रिया
विक्रम उत्सव 2026 के अंतर्गत “सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण 2026” हेतु विस्तत मानदंड एवं सम्मान श्रेणियों की घोषणा की गई है। यह अलंकरण सम्राट विक्रमादित्य के आदर्शो न्याय, सुशासन, ज्ञान, पराक्रम, संस्कृति-प्रेम एवं लोककल्याण को स्मरणीय बनाए रखने और उन्हें समाज में स्थापित करने के उद्देश्य से प्रदान किया जाएगा। अलंकरण के अंतर्गत अंतरराष्ट्रीय सम्मान के रूप में एक करोड एक लाख रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। यह सम्मान भारत का एक विशिष्ट अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार होगा, जो ऐसे व्यक्तित्व या संस्था को दिया जाएगा, जिसने वैश्विक स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां अर्जित करते हुए सम्राट विक्रमादित्य के उच्च आदर्शों सुशासन, न्यायप्रियता, ज्ञान-विज्ञान, सांस्कृतिक उन्नयन और लोककल्याण- का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया हो। इसके अतिरिक्त राष्ट्रीय स्तर पर इक्कीस लाख रुपये की सम्मान राशि के साथ राष्ट्रीय सम्मान प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उन व्यक्तियों/संस्थाओं को दिया जाएगा, जिन्होंने न्याय, दानशीलता, वीरता, विज्ञान, कला, साहित्य, अध्यात्म, सुशासन एवं जनकल्याण के क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान दिया है।राज्य स्तर पर तीन “शिखर सम्मान प्रदान किए जाएंगे, जिनमें प्रत्येक के लिए पांच-पांच लाख रुपये की सम्मान राशि निर्धारित की गई है। ये सम्मान प्रदेश स्तर पर उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं को दिए जाएंगे, जिन्होंने समाज, संस्कृति, ज्ञान-विज्ञान और जनहित के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो।
यह सम्मान युग निर्माण, विश्व मानव कल्याण, सामाजिक नवोन्मेष, भारतीय संस्कृति के उत्थान, दर्शन, धर्म, योग, परंपरा एवं वेदांत के प्रसार जैसे विविध क्षेत्रों में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों/संस्थाओं को प्रदान किया जाएगा। इसके लिए देश-विदेश से नामांकन आमंत्रित किए जाएंगे, जिनमें समाजसेवी, बुद्धिजीवी, लेखक, पत्रकार, वैज्ञानिक, कलाकार, उद्यमी एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल होंगे। चयन प्रक्रिया के लिए एक उच्च स्तरीय निर्णायक मंडल का गठन किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को सम्मिलित किया जाएगा। निर्णायक मंडल द्वारा चयनित नामों की अनुशंसा राज्य शासन को भेजी जाएगी, जिसकी स्वीकृति के पश्चात ही सम्मान की औपचारिक घोषणा की जाएगी। चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता, गुणवत्ता एवं उत्कृष्ट योगदान को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। यदि किसी वर्ष उपयुक्त व्यक्ति या संस्था चयन के मानकों पर खरी नहीं उतरती है, तो उस वर्ष संबंधित सम्मान प्रदान नहीं किया जाएगा। साथ ही, एक बार सम्मानित हो चुके व्यक्ति या संस्था को पुनः यह सम्मान प्रदान नहीं किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि इस अलंकरण हेतु आवेदन की अंतिम तिथि 20 मई 2026 निर्धारित की गई है। इच्छुक व्यक्ति एवं संस्थाएं निर्धारित समय-सीमा के भीतर अपने आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं।
2026-03-18



