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*प्रयागराज कि तरह उज्जैन सिंहस्थ 2028 में जूना अखाड़े के साथ शाही स्नान करेगा किन्नर अखाड़ा* –

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– उज्जैन में दो दिवसीय बैठक संपन्न, देश-विदेश से पहुंचे किन्नर,भजनों पर किया नृत्य, संत सम्मान भोज के साथ हुआ समापन, सनातनी किन्नरों को अखाड़े से जोड़ने पर मंथन
उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन में सिंहस्थ महाकुंभ 2028 की तैयारियों को लेकर किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। बैठक में देशभर से आए किन्नर समुदाय के साधु-संतों ने भाग लिया। इस दौरान कई संतों को महामंडलेश्वर, श्री महंत की उपाधि प्रदान की गई तथा देश के विभिन्न स्थानों पर होने वाले कुंभ आयोजनों की जिम्मेदारियां भी उन्हें सौंपी गई। इधर भजनो कि धुन पर किन्नर संतो ने महादेव कि भक्ति स्वरूप नृत्य भी किया।
बैठक के दौरान किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि सिंहस्थ 2028 में किन्नर अखाड़ा अब अकेले शाही स्नान नहीं करेगा, बल्कि जूना अखाड़ा के साथ मिलकर एक ही घाट पर स्नान करेगा। मीडिया से चर्चा करते हुए उन्होंने बताया कि किन्नर अखाड़ा लगातार विस्तार की ओर बढ़ रहा है और इसमें महामंडलेश्वर व श्री महंतों की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। यही कारण है कि इस बैठक में तमिलनाडु, कन्याकुमारी, उड़ीसा, महाराष्ट्र और गुजरात सहित विदेशों से भी किन्नर संत शामिल हुए। उन्होंने बताया कि बैंकॉक (थाईलैंड) और अमेरिका से भी किन्नर समुदाय के प्रतिनिधि बैठक में पहुंचे। बैठक के दौरान कंठी देकर कई नए चेले भी बनाए गए।
बकोल डॉ. त्रिपाठी “2019 में जूना अखाड़ा से अनुबंध हो चुका है। और हमने प्रयागराज और हरिद्वार में जूना के साथ ही कुम्भ स्नान किया हैं। अब आगे भी जहां जूना अखाड़ा शाही स्नान करेगा, वहीं किन्नर अखाड़ा भी स्नान करेगा और हम एक ही घाट पर मिलकर स्नान करेंगे। पिछले सिंहस्थ 2016 में किन्नर अखाड़े ने गंधर्व घाट से शाही स्नान किया था, लेकिन आगामी सिंहस्थ में ऐसा नहीं होगा। वर्ष 2019 में जूना अखाड़ा के साथ हुए अनुबंध के अनुसार अब दोनों अखाड़े एक ही घाट पर मिलकर शाही स्नान करेंगे।
*बैठक कि खास बातें*
• उज्जैन में किन्नर अखाड़े की दो दिवसीय बैठक संपन्न
• कई संतों को महामंडलेश्वर और श्री महंत की उपाधि एवं नये शिष्य बनाये
• देश-विदेश से पहुंचे किन्नर संत और प्रतिनिधि
• सिंहस्थ 2028 में जूना अखाड़े के साथ होगा शाही स्नान
• अखाड़े के विस्तार और संगठन मजबूती पर चर्चाओर संत सम्मान भोज के साथ हुआ समापन बैठक के समापन अवसर पर संत सम्मान भोज का आयोजन किया गया। इस दौरान अखाड़े के विस्तार और धार्मिक कार्यों को आगे बढ़ाने पर मंथन हुआ। साथ ही परंपरा अनुसार कंठी-चेलों की नियुक्ति भी की गई, ताकि अखाड़े के संगठनात्मक कार्यों को और मजबूत किया जा सके।
■ हरिद्वार नासिक उज्जैन बने नए महामंडलेश्वर व संतों को मिली जिम्मेदारी
बैठक में कई संतों को नई जिम्मेदारियां सौंपी गईं, जिनमें प्रमुख रूप से —
• पायल नंद गिरी (नासिक) – महामंडलेश्वर
• राधिका नंद गिरी (उज्जैन)
• पवित्रा नंद गिरी (उज्जैन)
• शिव लक्ष्मी नंद गिरी (उज्जैन)
• कनकेश्वरी नंद गिरी (उज्जैन)
• मयूरी नंद गिरी (उज्जैन)
इन संतों को अखाड़े के विस्तार, धार्मिक आयोजन और समाज सेवा के कार्यों को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी सौंपी गई।

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