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सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजन अधिगृहित भूमि हेतु विशेष पैकेज की घोषणा न किया जाने एवं केवल आश्वासन दिये जाने पर दिलीप सिंह सिसौदिया प्रतिनिधि एवं 13 ग्रामों के प्रभावित कृषकगणो ने पत्रकार वार्ता में प्रेस क्लब तरण ताल पर जानकारी देते हुए बताएं

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उज्जैन फील्ड सिंहस्थ-2028 को लेकर हो रहे दो बड़े काम इंदौर-उज्जैन ग्रीन रोड और सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट को लेकर दोनों क्षेत्र के किसानों ने सोमवार को आक्रोश व्यक्त किया। ग्रीन फील्ड रोड से प्रभावित 7 गांवों के किसानों ने सभी गांवों से पैदल यात्रा निकाली। वहीं सिलारखेड़ी-सेवरखेड़ी प्रोजेक्ट से प्रभावित 13 गांव के किसानों ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए मुआवजा नहीं मिलने पर प्रशासन को 3 दिन बाद काम रुकवाने की चेतावनी दे डाली। सबसे पहले इंदौर-उज्जैन के बीच बन रहे 48 किमी ग्रीन फील्ड रोड को लेकर किसानों को प्रदर्शन शुरू हुआ। इस रोड से प्रभावित होने वाले 7 गांव के किसानं सुबह 10.30 बजे ग्राम लिम्बा पिपलिया पहुंचे। महिलाओं ने न्याय ध्वज की पूजा करते हुए यात्रा का शुभारंभ किया। बैंड बाजे के साथ हाथ में झंडा व स्लोगन लिखी तख्ती लिए बड़ी संख्या में महिला-पुरुषों की यात्रा शुरू हो गई। जो ग्राम गोंदिया, हासामपुरा, पालखेड़ी, चांदमुख, दाउदखेड़ी होते हुए शाम करीब 5 बजे चिंतामण गणेश मंदिर पहुंची। इस दौरान सभी गांवों में सभा भी आयोजित की गई। ग्रामीणों ने भगवान चिंतामण गुणेश को प्रपत्र भी सौंपा। भारतीय किसान संघ के जिला कोषाध्यक्ष राजेश सिंह सोलंकी ने बताया कि सड़क के लिए हमारी जमीन तो ली जा रही है। लेकिन उसका न तो बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा दिया जा रहा है और न ही गांवों को सड़क से कनेक्ट किया जा रहा है। उक्त सड़क की हाइट ही जमीन से 6 से 9 फीट ऊंची की जा रही है। न्याय ध्वजा
इंदौर उज्जैन ग्रीन फील्ड रोड के विरोध में न्याय यात्रा निकालते सा गांव के लोग। जमीन की कीमत के आधार पर मुआवजा नहीं तो 3 दिन बाद रुकवा देंगे निर्माण शिप्रा को हमेशा प्रवाहमान बनाए रखने सहित विक्रम उद्योगपुरी को जल प्रदाय करने के लिए करीब 6 माह पहले शुरू हुए सेवरखेड़ी-सिलारखेड़ी परियोजना को लेकर भी सोमवार को ग्रामीण खुलकर विरोध में खड़े हो गए। दोपहर करीब 2 बजे पत्रकारों से चर्चा करते हुए परियोजना से प्रभावित 13 गांवों के किसानों ने मुआवजा दिए बगैर निर्माण शुरू करा देने का आरोप लगाया। वहीं अगले 3 दिन में बाजार मूल्य के हिसाब से मुआवजा देने संबंधी कार्रवाई नहीं होने पर यहां हो रहे निर्माण को रुकवाने की चेतावनी दे डाली। क्षेत्र के किसान दिलीपसिंह सिसौदिया ने बताया कि परियोजना से 13 गावों की करीब 400 बीघा जमीन प्रभावित हो रही है। लेकिन इस जमीन के मालिक 250 से 300 भू-स्वामियों को सरकार ने अब तक मुआवजा नहीं दिया। मुआवजे की जो चर्चा चल रही है वह गाइड लाइन को आधार मानकर 8-9 लाख रुपए बीघा की हो रही है। जबकि क्षेत्र की जमीन सही कीमत 50-60 लाख रुपए प्रति बीघा है। सिसौदिया ने बताया कि अगले तीन दिन में यही क्षेत्र के प्रभावित किसानों को मुआवजा नहीं दिया गया। तो चौथे दिन से हम परियोजना का निर्माण कार्य रुकवा देंगे।

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