“उद्गम से संगम पर्यंत सम्पूर्ण शिप्रा प्रदक्षिणा” के संबंध में “त्रिशूल शिवगण वाहिनी” द्वारा प्रेस कॉन्फ्रेंस मेंउपस्थि महामंडलेश्वर शैलेषानंदजी गिरी जूना अखाड़ा ,महामंडलेश्वर ज्ञान दास जी महाराज निर्मोही अखाड़ा, संत समिति उज्जैन के अध्यक्ष विशाल दास जी महाराज एवं संयोजक संस्थापक सुरेन्द्र चतुर्वेदी ने पत्रका वार्ता में जानकारी देते हुए बताया

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त्रिशूल शिवगण वाहिनी द्वारा “उद्दूम से संगम पर्यंत संपूर्ण शिप्रा प्रदक्षिणा” यात्रा का आयोजन किया जा रहा है. प्रदक्षिणा यात्रा, प्रेरणा खोत महामंडलेश्वर श्री शैलेश आनंद गिरि जी जूना अखाड़ा एवं महामंडलेश्वर श्री ज्ञान दास जी निर्मोही अखाड़ा दादू दयाल आश्रम के मार्गदर्शन में दिनांक 02 नवम्बर 2025 को प्रातः 08.00 बजे रामघाट मुख्य आरती द्वार, उज्जैन से प्रारम्भ होकर दिनांक 05 नवम्बर 2025 को सायं 5 बजे के उपरांत रामघाट पर ही एक दिया शिप्रा के नाम अभियान के साथ सम्पन्न होगी।
उक्त जानकारी देते हुए त्रिशूल शिवगण वाहिनी के संस्थापकगण आदित्य नागर पूर्व अपर आयुक्त नगर निगम एवं सुरेन्द्र चतुर्वेदी, राष्ट्रीय अध्यक्ष, अखिल भारतीय ब्राहम्मण समाज ने बताया कि शिप्रा प्रदक्षिणा का उद्देश्य पवित्र पावनी शिप्रा नदी को उसके पौराणिक स्वरुप में लौटाने और उसे निर्मल करने के लिए जनजागरण करना और आम नागरिकों को जल संवर्धन के प्रेरित करना है। उन्होने बताया कि यशस्वी मुख्यमंत्री श्री मोहन यादवजी द्वारा शिप्रा के लिए किये गए कार्य को आगे बढ़ाया जाकर शासन को जनता का सहयोग दिलाना भी संस्था का उ‌द्देश्य है। यात्रा की जानकारी देते हुए संस्थापकगण ने बताया कि यात्रा दिनांक 2 नवम्बर 25 को मुख्य आरती द्वार रामघाट से प्रातः 8 बजे प्रारम्भ होगी जिसमें आशीर्वाद दाता परमपूज्य सर्व श्रीमहंत पीर सुन्दरपुरीजी महाराज, जूना अखाडा (दत्त अखाड़ा घाट), जगद्‌गुरु श्री श्रीकांताचार्यजी, तिरुपति धाम, श्री रंगनाथाचार्य जी अवंतिका पीठाधीश्वर रामानुज कोट, महंतश्री रामेश्वरदास जी महाराज अध्यक्ष स्थानीय अखाडा परिषद, महामंडलेश्वर शांति स्वरूपानंद जी संस्थापक चार धाम आश्रम, महामंडलेश्वर श्री अतुलेषानंद सरस्वती, महामंडलेश्वर भागवातानंद गिरी भगवान बापू, निरंजनीअखाड़ा, महामंडलेश्वर धर्मेन्द्र गिरीजी, जूनाअखाड़ा, केवड़ेश्वरमहाकाल आश्रम, शिप्रा उद्दूम, महामंडलेश्वर श्री प्रेमानंद जी, महामंडलेश्वर श्री मनीष दास जी, ददुआ आश्रम, श्री वीतरागानंद जी सरस्वती दंडी स्वामी संस्थापक उपनिषद आश्रम, महामंडलेश्वर श्री नरसिंह दास जी, मांडव पीठ, सहित संत समाज के महामंडलेश्वर, पीठाधीश्वर, संत, महंत, धर्मगुरुओं का सानिध्य रहेगा, साथ ही समय-समय पर आमंत्रित विशिष्ट धर्मगुरुओं की भी उपस्थिति रहेगी. प्रदक्षिणा के दौरान विभिन्न पड़ाव स्थलों पर “सनातन पंचायत” के माध्यम से धर्म चेतना सभा आयोजित की जावेगी. संस्थापक आदित्य नागर ने विस्तृत कार्यक्रम देते हुए बताया कि प्रदक्षिणा यात्रा में 100 से अधिक यात्री सम्मिलित होंगे । यात्रा दिनांक 2 नवम्बर को ग्राम बोलासा, शिप्रा, दकनाखेडी होती हुई मुंडला दोसर शिप्रा उद्‌गम पर पहुंचेगी जहां रात्री विश्राम होगा । 03 नवम्बर को शिप्रा उद्गम से सिमरोड होते हुए दत्त अखाडे पर पहुंचेगी जहां शिप्रा आरती एवं पूजन होगा तथा उपनिषद आश्रम /दादूदयाल आश्रम पर सनातन पंचायत होगी तथा रात्री विश्श्राम होगा। दिनांक 04 नवम्बर को उपनिषद आश्रम से यात्रा निकलकर मेलेश्वर महादेव उन्हेल, आलोट होते हुए ग्राम सिपावरा शिप्रा चम्बल संगम पर पहुंचेगी जहां सनातन पंचायत एवं रात्री विश्राम होगा। दिनांक 05 नवम्बर को शिप्रा चम्बल संगम से महिदपुर, नारायणा धाम होते हुए सायं 5 बजे रामधाट आरती द्वार पर पहुंचेगे । रामघाट पर शिप्रा पूजन, शिप्रा आरती, चुनरी समर्पण के उपरांत “एक दिया शिप्ना के नाम” अभियान की शुरुआत की जावेगी जिसमें आम जनों से एक दिया शिप्रा को अर्पित करने की अपील की गई है। सभी पढाव स्थलों पर भी दीप दान किया जावेगा। इसके पूर्व दिनांक 01 नवम्बर को यात्रा की पूर्व संध्या पर आरती द्वार रामघाट पर शिप्रा मैया की आरती की जाकर यात्रा की सफलता के लिए आशिर्वाद लिया जावेगा।
इस अवसर पर ध्यानश्री शैलेष आनंद गिरी महाराज महामण्डलेश्वर ने बताया कि सनातन पंचायत के माध्यम से नदी-नारी और न्याय पर चर्चा की जावेगी जिसमें आम जनता को इनकी रक्षा के लिए आगे आने का आव्हान किया जावेगा। शिप्रा नदी को उसके पौराणिक स्वरुप में लौटाने के लिए सभी को पूरी लगन के साथ आगे आना होगा। श्री ज्ञान दास जी महाराज ने कहा कि शिप्रा मैया को गंदगी से मुक्त करने और उसे प्रवाहमान बनाने के लिए बहुत आवश्यक है कि इसकी विस्तृत योजना बनाने के साथ ही आम जन में जागृति पैदा की जाकर उसमें मिलने वाले नालों और नदियों को रोका जाए तथा जल संवर्धन के लगातार प्रयास किये जायें। महत श्री विशालदास जी महाराज, निर्वाणी अखाडा, अध्यक्ष संत समिति ने शिप्रा नदी के संख्क्षण के लिए पौधों को लगाने, बड़े पेड़ों को नहीं काटने के लिए जन जागरण की बात कही। उन्होंने कहा कि जन जागरण से ही नदी की रक्षा की जा सकती है, नदी हमें पानी देती है तो हमें नदी को गंदी नहीं करना चाहिये।

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