आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज, एवं सी.आर. गार्डी हॉस्पिटल, उज्जैन (चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान एवं मानव सेवा की 25 वर्षों की गौरवशाली यात्रा 27 फरवरी 2001 को मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एवं भारत सरकार से अनुमति प्राप्त करने के पश्चात 9 अप्रैल 2001 को आर.डी. गाडी मेडिकल कॉलेज का भव्य उद्घाटन माननीय श्री दिग्विजय सिंह जी (तत्कालीन मुख्यमंत्री), माननीय श्री नरेंद्र नाहटा जी (तत्कालीन स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री) एवं माननीय डॉ. विजयलक्ष्मी साधो जी (तत्कालीन चिकित्सा शिक्षा मंत्री) के करकमलों द्वारा उज्जैन चैरिटेबल ट्रस्ट हॉस्पिटल परिसर में हुआ। 8 अगस्त 2001 को नवीन मेडिकल कॉलेज भवन का शिलान्यास माननीय डॉ. सी.पी. ठाकुर जी (तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री), माननीय श्री सुंदरलाल पाटवा जी एवं माननीय डॉ. सत्यनारायण जटिया जी द्वारा किया गया। इसके पश्चात 20 मार्च 2006 को आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज ऑफ नर्सिंग, 10 सितंबर 2006 को उज्जैन इंस्टिट्यूट ऑफ पैरामेडिकल साइंसेज एवं कॉलेज ऑफ फिजियोथेरेपी की स्थापना हुई। वर्ष 2009 में एमसीआई एवं भारत सरकार द्वारा 17 विषयों में पोस्ट ग्रेजुएशन की अनुमति मिली तथा पल्मोनरी मेडिसिन, डर्मेटोलॉजी एवं साइकियाट्री जैसे पीजी कोर्स मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़ में पहली बार प्रारंभ हुए। 28 जून 2012 को एमबीबीएस सीटों की संख्या बढ़ाकर 150 कर दी गई।गुणवत्ता पर केंद्रित दृष्टि
ट्रस्टीगणों ने सीटें बढ़ाने के बजाय शिक्षण एवं रोगी देखभाल की गुणवत्ता पर बल दिया। इसके परिणामस्वरूप आर.डी. गार्डी मेडिकल कॉलेज को भारत के श्रेष्ठ मेडिकल कॉलेजों में स्थान मिला तथा ब्रिटिश हाई कमीशन द्वारा इसे उन शीर्ष 50 मेडिकल कॉलेजों में मान्यता दी गई जिन्हें ब्रिटिश विश्वविद्यालयों / अस्पतालों के साथ शोध सहयोग की अनुमति है।
अनुसंधान में वैश्विक पहचान
नवंबर 2012 में इंटरनेशनल सेंटर फॉर हेल्थ रिसर्च की स्थापना हुई। संस्थान का करोलिंस्का इंस्टिट्यूट (स्वीडन), नॉर्डिक स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, बर्गन यूनिवर्सिटी (नॉर्वे), किंग्स कॉलेज लंदन, लिवरपूल स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, मेयो क्लिनिक (USA), ICMR, UNFPA, सहित विश्व के शीर्ष संस्थानों से शोध सहयोग है। प्रतिवर्ष लगभग 150 उच्च गुणवत्ता के शोध पत्र प्रकाशित किए जाते हैं। यूरोपियन यूनियन द्वारा वित्तपोषित विश्वप्रसिद्ध शोध परियोजनाएँ MATIND एवं APRIAM (2006 से सतत, एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस पर विश्व की सबसे बड़ी परियोजनाओं में से एक) संस्थान की पहचान हैं।
डिजिटल मैपिंग एवं नीति निर्माण में योगदान भारत में मेडिकल कॉलेजों एवं स्वास्थ्य सेवाओं की असमानता पर डिजिटल मैपिंग आधारित शोध ने 65 प्राथमिकता जिलों की पहचान की। इस शोध के आधार पर डॉ. वी. के. महाडिक के सुझावों को केंद्र सरकार ने स्वीकार किया, जिससे राष्ट्रीय स्तर पर चिकित्सा शिक्षा नीति को दिशा मिली। उज्जैन जिला एवं संपूर्ण मध्यप्रदेश में स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की डिजिटल मैपिंग विश्व में पहली बार-स्वास्थ्य सेवा की पहुंच एवं गुणवत्ता में क्रांतिकारी कदम सिद्ध हुई।ग्रामीण स्वास्थ्य में अनुकरणीय मॉडल पलवा फील्ड लैब एवं 60 गांवों (जनसंख्या 92,000) को गोद लेकर 65 स्वयंसेवी स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के माध्यम से व्यापक स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान की गई। DOTS थेरेपी के माध्यम से अधिकांश गांव टीबी मुक्त बने और स्वास्थ्य सूचकांकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ।
2026-01-22





