उज्जैन जब किसी विचार या कार्य की प्रशंसा उसके विरोधी भी करने लगे तो यह उस विचार की सफलता का सबसे बड़ा प्रमाण होता है। सनातन परंपरा केवल आस्था तक सीमित नहीं है बल्कि यह समाज, राष्ट्र और मानव जीवन को दिशा देने वाली ऋषि परंपरा से निकली हुई विचारधारा है।यह बात महामंडलेश्वर स्वामी डॉ. सुमनानंद गिरि महाराज ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष अंतर्गत आयोजित कालिदास नगर नागझिरी में आयोजित हिंदू सम्मेलन में संबोधित करते हुए कही। इस सनातन अवसर पर आयोजकों ने उनका स्वागत कर आशीर्वाद लिया। सम्मेलन में बड़ी संख्या में युवा, स्वयंसेवक एवं धर्मावलंबी उपस्थित थे। महामंडलेश्वर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ऋषि का विचार ही संघ का विचार है। जब इस विचार की स्वीकार्यता वैचारिक विरोधियों तक में बनने लगे, तो उसके विराट और व्यापक स्वरूप को कोई भी शक्ति रोक नहीं सकती। सम्मेलन में उपस्थित युवाओं ने गुरुदेव के विचारों को गंभीरता से सुना और सनातन संस्कृति, राष्ट्रभक्ति तथा को अपने जीवन में आत्मसात सामाजिक समरसता के मूल्यों करने का संकल्प लिया।
2026-01-14






