*भारत की संस्कार परंपरा ही रत्नों की खान है*
(24 यज्ञशाला में 125 से अधिक पुंसवन संस्कार हुए।
हजारों दीपकों की झिलमिल में महिला सशक्तिकरण संकल्प और सम्मान।)
गायत्री शक्तिपीठ उज्जैन के 40 में स्थापना दिवस समारोह के द्वितीय दिन सोमवार को प्रातः 9:00 से 24 कुंडीय गायत्री यज्ञ शाला में देव आवाहन पूजन के साथ यज्ञ किया दी गई विशेष संस्कार के रूप में 125 से अधिक गर्भवती महिलाओं का पुंसवन संस्कार कराया गया। जिसके अंतर्गत उन्हें दिव्य चेतना को आत्मसात करने, नवागंतुक को सुसंस्कृत और समुन्नत बनाए रखने का संकल्प दिलाया गया ।उनके परिजनों को गर्भवती के स्वास्थ्य और प्रसन्न रहने का प्रयत्न करने तथा परिवार में मनोमालिन्य ना उभरने देने का संकल्प कराया गया।
डॉ श्रीमती जया मिश्रा ने गर्भिणी को आहार-विहार के बारे में विस्तृत जानकारी दी। श्रीमती नीति टंडन ने पीपीटी पॉइंट द्वारा गर्भस्थ शिशु के विकास की जानकारी थी श्रीमती उर्मिला तोमर गर्भवती बहनों का तिलक अभिनंदन कर स्वागत किया।
औषधि अवग्राण, चरू प्रदान,सद्साहित्य और शुभाशीष के बाद गर्भिणिंयों को विदा किया गया ।अधिकांश गर्भिणिंयों के साथ आंगनबाड़ी सहायिकाएं भी आई थी, जिन्होंने पुंसवन संस्कार का प्रशिक्षण प्राप्त किया।
सायंकाल महिला सशक्तिकरण गोष्ठी में पूर्व महापौर श्रीमती मीना जोनवाल ने गायत्री परिजनोंको गायत्री शक्तिपीठ के 40 वें स्थापना दिवस पर हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं दी। सुश्रीअरुणा सेठी प्राचार्य विधि महाविद्यालय ने महिलाओं के कानूनी अधिकार और कर्तव्यों की जानकारी दी। आपने बताया कि अधिकार कर्तव्यों एक सिक्के के दो पहलू हैं ।विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान करनी बाली नगर की करीब15 विशिष्ट महिलाओं का सम्मान दीप यज्ञ के हजारों दीपकों की झिलमिल रोशनी में शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे विद्वानों ने किया।
2022-03-14





