15 किलो 500 ग्राम गांजा अवैध रूप से रखने वाले आरोपी को न्यायालय ने 05 वर्ष सश्रम का कारावास की
माननीय न्यायालय विशेष न्यायाधीश श्रीमान वैभव मंडलोई, (एन.डी.पी.एस.) उज्जैन के न्यायालय द्वारा आरोपी शाकिर उर्फ काला पिता अब्दुल अजीज उर्फ बंबईया, उम्र-48 वर्ष निवासी-शफी सेठ की मल्टी फ्लेट नम्बर-305 लोहे के पुल के पास जिला उज्जैन को धारा 8/20 स्वापक औषधी एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम में आरोपी को 05 वर्ष का सश्रम कारावास एवं 25,000/- रूपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया गया।
उप-संचालक (अभियोजन)/पैरवीकर्ता डॉ. साकेत व्यास ने अभियोजन की घटना अनुसार बताया कि दिनांक 17.03.2015 को थाना महॉकाल पर पदस्थ उपनिरीक्षक विक्रमसिंह को थाने पर मुखबीर से सूचना मिली कि एक व्यक्ति कंधे पर टाट की बोरी लिए, शंकराचार्य चौराहा से भूखी माता मंदिर की ओर जा रहा है जिसकी टाट की बोरी में मादक पदार्थ गांजा है उसे शीघ्र पकडा जाये अन्यथा वह मादक पदार्थ को खुर्दबुर्द कर सकता है। सूचना की तस्दीक कर आरक्षक के माध्यम से दो स्वतंत्र पंचों को तलब कर मुखबीर की सूचना से अवगत कराया। इसके उपरांत उपनिरीक्षक विक्रमसिंह मय फोर्स, पंचों एवं विवेचना सामग्री व शासकीय वाहन से मौके पर पहुचे। मुखबीर की सूचना अनुसार व्यक्ति के मिलने पर उससे उसका नाम पता पूछा तो उसने अपना नाम शाकिर उर्फ काला पिता अब्दुल अजीज निवासी उज्जैन का होना बताया। जिसके पश्चात् विक्रमसिंह द्वारा एनडीपीएस एक्ट के अंतर्गत विहित प्रक्रिया का पालन करते हुये उसकी तलाशी लेते उसके पास टाट की बोरी में 15 किलो 500 ग्राम गांजा मिला। जिसका उक्त गांजा रखने के बारे में आरोपी से लाईसेंस का होना नही बताया। इस पर आरोपी से गांजा विधिवत जप्त कर आरेापी को गिरफ्तार किया गया व थाने पर अपराध पंजीबद्ध किया गया। विवेचना के उपरांत अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया गया।
दण्ड के प्रश्न परः- अभियुक्त द्वारा के निवेदन किया गया कि अभियुक्त गरीब है वह बीमार रहता है एवं परिवार का एकमात्र कमाने वाला व्यक्ति है। अभियोजन अधिकारी द्वारा अभियुक्त को कठोर दण्ड से दण्डित किये जाने का निवेदन किया।
न्यायालय की टिप्पणी:- स्वापक औषधी और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम के कठोर विधिक प्रावधानों के बावजूद मादक पदार्थो से संबंधित अपराधों में वृद्धि हो रही है, जिनके कारण समाज पर पडने वाले प्रभाव को देखते हुये आरोपी के प्रति कोई नरम रवैया अपनाया जाना न्योचित प्रतीत नही होता है।
प्रकरण में शासन की ओर से संचालन डॉ0 साकेत व्यास, उप-संचालक उज्जैन द्वारा पैरवी की गई।
2021-10-26






